रिपोर्ट : रंजना तिवारी
भागलपुर/देवरिया: भागलपुर क्षेत्र में विद्युत व्यवस्था इन दिनों बदहाली की चरम सीमा पर पहुंच चुकी है। गांवों में जर्जर तार, कम क्षमता वाले ट्रांसफार्मर और अवैध कनेक्शनों की भरमार ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि बिजली आपूर्ति की दोहरी नीति चल रही है—एक ओर सरकारी व्यवस्था नाममात्र की है, तो दूसरी ओर अवैध कनेक्शनों का खुला खेल जारी है।
**पेड़ों पर लटके तार, हादसों का खतरा**
कई जगहों पर बिजली के तार हरे पेड़ों पर लटक रहे हैं, जो किसी भी समय बड़े हादसे को न्योता दे सकते हैं। तारों के टूटकर गिरने की घटनाएं आम हो चुकी हैं, और लोग पास-पड़ोस से अस्थायी तार जोड़कर बिजली लेने को मजबूर हैं। इससे शॉर्ट सर्किट और दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना हुआ है।
**लाइनमैन पर अवैध वसूली का आरोप**
ग्रामीणों ने लाइनमैन और विद्युत विभाग पर मिलीभगत का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि लाइनमैन पैसे लेकर अवैध कनेक्शन दे रहे हैं। प्रहलाद तिवारी, अर्जुन सिंह, रामायण ठठेरा, श्याम बिहारी मौर्य, सरवन चौहान, राजेश ठठेरा और मुन्ना ठठेरा जैसे ग्रामीणों ने अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। विभाग के सीयूजी नंबर भी जवाब नहीं देते।
**जर्जर केबल, लो वोल्टेज की मार**
गांवों में लगे पुराने और घटिया केबल बार-बार शॉर्ट सर्किट का कारण बन रहे हैं। ट्रांसफार्मरों की कम केवी क्षमता और बढ़ते लोड के चलते वे आए दिन फुंक रहे हैं। अगर बिजली आती भी है, तो लो वोल्टेज की समस्या ग्रामीणों को परेशान करती है।
**‘अच्छे दिनों’ के वादे पर सवाल**
घनी आबादी वाले इस क्षेत्र में बिजली जैसी बुनियादी सुविधा की यह हालत ‘अच्छे दिनों’ के दावों पर सवाल खड़े करती है। ग्रामीणों का कहना है कि विद्युत विभाग की उदासीनता के कारण उनकी मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं।
**सवाल बाकी, कब मिलेगी राहत?**
ग्रामीणों की मांग है कि जर्जर तारों को बदला जाए, ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाई जाए और अवैध कनेक्शनों पर रोक लगे। अब देखना यह है कि विभाग इस बदहाल व्यवस्था को सुधारने के लिए कब और क्या कदम उठाता है।
