लघु कहानी
मुरली मनोहर पांडेय
हमारे देश का एक राज्य है उड़ीसा उड़ीसा राज्य में एक नगर है कटक नगर के चौराहे पर एक बुढ़िया भिखारी बैठी थी सबसे भीख मांगती थी कुछ बालक प्रतिदिन इसी चौराहे से होकर स्कूल जाते थे बुढ़िया इन स्कूली बच्चों से भी भीख मांगती थी अधिकतर बच्चे बुढ़िया की पुकार पर ध्यान नहीं देते थे वह उसकी बात को अनसुनी करके आगे बढ़ जाते थे एक बालक को बुढ़िया पर दया आ गई वह प्रतिदिन अपने खाने के डिब्बे में से दो रोटियां भिखारी को देने लगा बुढ़िया बालक को अनेक दुआएं और आशीर्वाद देती बालक को अच्छा लगता समय बिता गया यह बालक प्रत्येक दिन उसे बुढ़िया को अपने टिफिन से दो रोटियां दे दिया करता था एक दिन स्कूल जाते समय उसे बालक ने देखा कि चौराहे पर वह बुढ़िया नहीं है के विद्यालय चला गया बालक का मन विद्यालय में नहीं लगा लंच के बाद वह बालक अपना भोजन ग्रहण किया और बुढ़िया के लिए कुछ भोजन बच्चा भी लिया लौटते समय शाम को रास्ते में बुढ़िया का पता नहीं लगने पर आसपास के लोगों से जब बुढ़िया के बारे में जानकारी लिया तो पता चला की बुढ़िया रात को मार गई है उदास मानव बालक अपने घर चला गया उनकी मां ने उनसे पूछा आप क्यों इतने उदास हो क्या हुआ है उसे बालक ने सारी कहानी अपनी मां को बता दिया काम है जी बुढ़िया को प्रत्येक दिन दो रोटियां खिलाया करता था वह आज रात मर गई है मेरे दुख का यही सबसे बड़ा कारण है मां ने बालक को बहुत समझाया यह बालक कोई और नहीं सुभाष चंद्र बोस थे जो आगे चलकर के आजाद हिंद फौज की स्थापना की और भारत माता को आजाद करने में अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया।
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