मुरली मनोहर पांडेय की कलम से
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| मुरली मनोहर पांडेय |
उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री बहुजन समाज पार्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि बसपा में राजनीति करने वाले किसी भी व्यक्ति का भविष्य बसपा में बहुत सुरक्षित नहीं है कभी भी उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है यह माना जा रहा था की बहन मायावती अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी का बागडोग सौंपेंगी यह भी माना जा रहा था कि आकाश आनंद पार्टी के इकलौते उत्तराधिकारी हैं काफी सक्रिय रहते थे और बहन जी के साथ रहते थे लेकिन अचानक बहन जी ने अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी की सभी जिम्मेदारियो से मुक्त कर दिया और कहा कि अब उनकी आखिरी सांस तक पार्टी में उनका कोई उत्तराधिकारी नहीं होगा हम आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मायावती ने आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ को पिछले महीने पार्टी से निष्कासित कर दिया था यह कयास लगाया जा रहा था कि राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो यह चर्चा भी राजनीतिक गलियारे में तेज हो गई थी कि कहीं ना कहीं आकाश आनंद पर भी तलवार लटक रही है जिसको बहन जी ने चरितार्थ कर दिया पूर्व मुख्यमंत्री राजधानी लखनऊ में हुई बसपा के राष्ट्रीय स्तर की बैठक के बाद यहां जारी एक बयान में कहा कि पार्टी हित में आकाश आनंद को सभी जिम्मेदारियां से मुक्त कर दिया गया है यह भी कहा गया कि इस कार्यवाही के लिए पार्टी नहीं बल्कि पूर्ण रूप से उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ जिम्मेदार है मायावती ने सिद्धार्थ को पार्टी विरोधी गतिविधियों को लेकर पिछले महीने बसपा से निष्कासित कर दिया था लेकिन यह मामला खुलकर के सामने नहीं आया कि सिद्धार्थ ने ऐसा क्या किया जिससे की पार्टी हित में सिद्धार्थ को बाहर का रास्ता दिखाया गया बयान के मुताबिक बहन जी ने कहा अब मैं यह निर्णय लिया है कि मेरे जीते जी वह मेरी आखिरी सांस तक पार्टी में मेरा कोई उत्तराधिकारी नहीं होगा पार्टी ने पूर्व में आकाश आनंद को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था लेकिन पिछले साल हुए लोकसभा चुनाव के दौरान एक विवादित बयान देने को लेकर बहन जी ने अपने भतीजे से यह वहदा वापस ले लिया था हालांकि बाद में बहन जी ने उन्हें फिर से अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था बयान के मुताबिक मायावती ने पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं अपने सबसे छोटे भाई आनंद कुमार को पार्टी समन्यवक की भी जिम्मेदारी सौंपी है इसके अलावा रामजी गौतम को पार्टी का राष्ट्रीय समन्यवक बनाने की भी घोषणा की गई है सवाल यह उठता है की क्या बसपा बिना नौजवानों के प्रदेश में सत्ता में भागीदारी सुनिश्चित कर पाएगी राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो मान्यवर कांशीराम ने बसपा को जहां से शुरू किया था आज बसपा वहीं आकर के खड़ी हो गई है विधानसभा में एक विधायक और लोकसभा में एक भी संसद नहीं है एक दौर था जब बसपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी थी बहन जी 5 साल तक मुख्यमंत्री रही इसके पूर्व में भी बहन की तमाम घटक दलों के साथ मिलकर के सरकार बनाई और मुख्यमंत्री भी रही है अब देखना यह है कि आने वाले समय में बसपा का भविष्य दांव पर लगता है या आकाश आनंद का भविष्य दांव पर लगता है क्या बसपा में आकाश आनंद बने रहेंगे या कोई दूसरी राजनीतिक पृष्ठभूमि तलासेंगे या आने वाला वक्त ही तय करेगा वैसे भी 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए बसपा के लिए अभी बहुत ही कठिन दौर है इस कठिन दौर से बसपा कैसे निकल पाएगी बसपा के मूल मतदाता भी अब बसपा के साथ नहीं रहे ।

