रिपोर्ट: रामदुलारी पटेल
बाराबंकी। खरीफ फसलों की बुवाई के मद्देनज़र जनपद में उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और किसानों को किसी प्रकार की कठिनाई न हो, इस उद्देश्य से जिला कृषि अधिकारी राजित राम वर्मा द्वारा आज समस्त उर्वरक प्रदायकर्ता कंपनियों एवं थोक विक्रेताओं की बैठक आयोजित की गई।
बैठक में सभी विक्रेताओं को सख्त निर्देश दिए गए कि वे किसी भी उर्वरक के साथ अन्य उत्पादों की टैगिंग न करें और न ही निर्धारित दर से अधिक मूल्य पर उर्वरक की बिक्री करें। किसानों को उर्वरक उनकी जोत या कृषित भूमि के आधार पर ही POS मशीन से बेचा जाए। यदि किसान बटाईधारक हो तो उस स्थिति में POS मशीन में भूमि मालिक का आधार व भूमि अभिलेख दर्ज करना अनिवार्य होगा।
इसके अलावा, जिन किसानों द्वारा 10 बोरी से अधिक की खरीद की जाती है, उनसे उनकी जोत बही/खतौनी प्राप्त की जाएगी और उसमें दर्ज कृषि भूमि व फसल की संस्तुति के अनुसार उर्वरक की बिक्री की जाएगी। सभी बिक्री का विवरण बिक्री रजिस्टर में अद्यतन रूप से संधारित करना आवश्यक होगा।
जिला कृषि अधिकारी ने यह भी निर्देशित किया कि प्रत्येक प्रतिष्ठान पर स्टॉक और रेट बोर्ड अनिवार्य रूप से प्रदर्शित किया जाए और किसानों को रसीद देना सुनिश्चित किया जाए। साथ ही केवल अधिकृत विक्रेताओं से ही उर्वरक प्राप्त किया जाए, अन्यथा संबंधित विक्रेता पूर्ण रूप से उत्तरदायी माने जाएंगे।
फुटकर/थोक विक्रेताओं को केवल उन्हीं उत्पादों का विक्रय, भंडारण या परिसंचलन करने का निर्देश दिया गया है जो उर्वरक (नियंत्रण) आदेश 1985 एवं राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित हों। किसी भ्रमजनक या मिलते-जुलते उत्पाद का विक्रय पूर्णतः वर्जित रहेगा।
जिन विक्रेताओं के पास एल-0 श्रेणी की POS मशीन है, उन्हें शीघ्र ही कंपनी द्वारा वितरित एल-1 मशीन से अपनी मशीन का प्रतिस्थापन कराना होगा, अन्यथा उन्हें उर्वरक आपूर्ति नहीं दी जाएगी।
अंत में जिला कृषि अधिकारी ने स्पष्ट किया कि यदि कोई विक्रेता निर्धारित दर से अधिक पर उर्वरक बेचते हुए पाया गया या टैगिंग के साथ अन्य उत्पाद बेचता है, तो उसके विरुद्ध उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 और आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3/7 के अंतर्गत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
