रिपोर्ट : प्रिंस प्रजापति
बलिया के सुखपुरा गांव में 23 अगस्त 1942 को आजादी की लड़ाई में दो क्रांतिकारियों ने अपनी जान न्योछावर कर दी। यह घटना भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान हुई।
17 अगस्त 1942 को देवरिया से बलिया जा रहे अंग्रेज सिपाहियों से क्रांतिकारियों ने बंदूकें छीन लीं
इस घटना में नागेश्वर राय, हीरा गोंड, जंग बहादुर सिंह, राजनारायण सिंह और भरखरा के लोग शामिल थे।
19 अगस्त को चित्तू पांडेय की अगुवाई में बलिया आजाद हो गया। इससे क्रोधित अंग्रेजों ने 23 अगस्त को सुखपुरा गांव पर हमला कर दिया। अंग्रेज सिपाहियों ने वरिष्ठ कांग्रेसी चंडी लाल को चट्टी पर गोली मार दी।
इसके बाद वे महंत यदुनाथ गिरि के घर पहुंचे। महंत तो पिछले दरवाजे से निकल गए, लेकिन अंग्रेजों ने उनके हाथी और कुत्ते को मार दिया। आगे बढ़ते हुए सिपाहियों ने गौरी शंकर को गोली मार दी। कुलदीप सिंह अंग्रेजों को चकमा देकर भाग निकले और फिर कभी वापस नहीं लौटे। हर साल 23 अगस्त को सुखपुरा शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन लोग देश की आजादी के लिए शहीद हुए वीरों को श्रद्धांजलि देते हैं। बलिया का यह स्वतंत्रता संग्राम भारत के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज है।




