रिपोर्ट : प्रिंस प्रजापति
बलिया। कार की विंडो में गला फंसने से डेढ़ साल के मासूम की मौत हो गई। कार की पीछे वाली सीट पर मां की गोद में बैठा था। मां की गोद से उठा और चलती कार से बाहर झांकने लगा। बच्चे से कार की विंडो का स्विच दब गया। ऐसे में अचानक से उसका गला शीशे से दब गया। मां ने देखते ही शीशा नीचे किया। बच्चे को गोद में उठाया लेकिन उसका गला झूल गया। स्थिति को देखते हुए तुरंत अस्पताल लेकर भागे, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया। मामला बलिया जिले से 60 किमी दूर बेल्थरा रोड का है।
बेल्थरा रोड के रहने वाले रोशन के घर में 20 फरवरी को बहन की शादी थी। शादी में ही उन्होंने दहेज में देने के लिए कार खरीदी। शादी के बाद 9 मार्च को रोशन के जीजा कार से बेल्थरा रोड आए। 10 मार्च को रोशन की पत्नी रम्भा अपने चाचा और बहनोई के साथ बेल्थरा रोड से 13 किमी दूर चन्दाडीह गांव में मातु जी महारानी मंदिर में दर्शन करने गई थी।
सोमवार शाम 2.30 बजे सभी मंदिर पहुंचे। वहां से पूजा कर सब घर लौटने लगे। कार ड्राइवर चला रहा था। रम्भा बेटे रेयांश (डेढ़ साल) के साथ कार में पीछे की सीट पर बैठी थी। मंदिर से 2 किमी कुछ दूर निकलते ही बच्चा पीछे की सीट पर खड़ा हो गया।
मां ने सोचा वो खेल रहा है। विंडो का शीशा आधा खुला था। तभी बच्चे से गेट में लगे शीशे का बटन दब गया। शीशा तेजी से ऊपर की तरफ चढ़ा और रेयांश का गला दब गया। उसकी चीख सुनकर मां की नजर पड़ी। उसने तुरंत शीशे को नीचे किया।
ड्राइवर ने कार रोक दी। मां ने बच्चे को गोंद में उठा लिया। बच्चा बेहोशी की हालत में था। तुरंत उसे बेल्थरा रोड के एक निजी अस्पताल ले गए। वहां से डॉक्टर ने उसे मऊ रेफर कर दिया। जहां डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया। परिजनों ने बच्चे का पोस्टमॉर्टम नहीं कराया।
बच्चे की मां रम्भा ने रोते हुए बताया कि बेटा कार में मेरे बगल ही बैठा था। वो खेल रहा था। तभी सीट पर खड़े होकर बाहर झांकने लगा। उसके चीखने की आवाज सुनी। मैंने देखा कार के शीशे में वो फंसा है। मैंने तुंरत कार का शीशा नीचे किया।
वो गिर गया, मैंने उसे गोंद में उठाया। कई बार आवाज दी लेकिन वह नहीं बोला। बेहोशी की हालत में उसे लेकर अस्पताल भागे। लेकिन बेटे को नहीं बचा पाई। मेरा इकलौता बेटा मेरे सामने ही चला गया। मैं कुछ न कर सकी। बच्चे के पिता रोशन ने बताया कि बहन की शादी में देने के लिए कार खरीदी थी। दो दिन पहले ही जीजा कार लेकर घर आए थे। मेरी पत्नी बेटे को लेकर ससुर और जीजा के साथ गई थी। मैं दुकान पर गया था, इसलिए उनके साथ नहीं जा पाया।
शाम तीन बजे मेरे पास फोन आया। घटना के बारे में मेरी पत्नी ने मुझे बताया। मैं भागता हुआ अस्पताल पहुंचा। फिर बेटे को लेकर दूसरे अस्पताल गया, लेकिन उसकी मौत हो चुकी थी। मंदिर से लौटते समय हादसा
रोशन के भाई रवि ठाकुर ने बताया कि रेयांश रोशन का इकलौता बेटा था। तीन साल पहले ही रोशन की शादी हुई थी। रेयांश के पैदा होने पर लोग बहुत खुश थे। बीते 20 फरवरी को घर में बहन की शादी थी। उसी समय एक कार खरीद कर आई थी। शादी बीतने के बाद सभी कार की पूजा करने मंदिर ले गए थे। बाबू तो भाभी के साथ बैठा था। लेकिन वापसी के समय यह हादसा हो गया। घर में मातम छाया है।
