मुरली मनोहर पांडेय
उन्मुक्त उड़ान मंच की संस्थापिका अध्यक्षा डॉ दवीना अमर ठकराल”देविका”के मार्गदर्शन व निर्देशन में सांय छह बजे से सात बजे तक आभासी घनाक्षरी कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम संचालिका डॉ दवीना अमर ठकराल ने
पुनीत, पावन व पवित्र बैसाखी पर्व की मेहता बताते हुए सभी को बैसाखी पर्व की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ दी।
माँ शारदा की वन्दना करते हुए कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। घनाक्षरी छंद की महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए सभी उपस्थित सदस्यों को घनाक्षरी सुनाने वे गाने के लिए सादर आमंत्रित किया।
सभी प्रभुद्ध सदस्यों ने बैसाखी के उपलक्ष्य में बहुत सुंदर घनाक्षरियाँ गाकर कार्यशाला के आयोजन को सफल बनाया।
आया बैसाखी त्योहार, छायी फसलें बहार,
सोना उपजे धरती, बैसाखी मनाइए।
नीरजा शर्मा’अवनि’
बैसाखी का पर्व आया हंसी खुशी मन भाया,
फसलें कटने लगी,खुशियां मनाइए।
विनीता नरुला 'प्रसन्ना'
है ये सिक्खों का त्यौहार,गोविंद जी सरदार,
डाली सिख धर्म नींव,वैसाखी मनाइए।
डॉ पूनम सिंह ‘सारंगी’
सुनहरी गेहूँ खिली,पीत वर्ण आभा फैली,
मेला घूम मौज मना,मीठा तो खिलाइए।
डॉ.अनीता राजपाल ‘अनु’ वसुन्धरा
देखो आई है बैसाखी, मन के उड़े हैं पाखी,
आ भी जाओ मेरी साखी, आज खेलें फुगड़ी।।
दिव्या भट्ट 'स्वयं'
गुरुओं की बख़्शिश, सिखों ने दिए हैं शीश।
गुरबाणी की आशीष, बनी सच की आवाज।
शिखा खुराना
बैसाखी का ये त्यौहार,फसलों की है बहार,
लहराते सारे खेत,सुंदर निखार है।
रेखा पुरोहित ‘तरंगिणी’
चल सखी चले मेला,समा बड़ा अलबेला,
झूले छुएँ आसमान, झूल मजें लीजिए।
किरण भाटिया ‘अवनि’
बैसाखी का है संदेश, ख़ुश रहे सारा देश,
विकसित परिवेश, उमंग जगाइए।
डॉ फूलचंद्र विश्व कर्मा ‘भास्कर’
कार्यशाला में उपस्थित सभी सक्रिय सदस्यों का हार्दिक आभार प्रकट करते हुए अध्यक्षा ने अपनी घनाक्षरी गाकर कार्यक्रम का समापन किया।
बैसाखी का पर्व ख़ास, मन छाया है उल्लास,
ढोलक की थाप पर, नाचिए मनाइए।
सूर्य मेष में प्रवेश, दिन यह है विशेष
गंगा अवतरण हुआ,झूम-झूम गाइए।
खालसा पंथ आरंभ, गुरुवाणी औ लंगर,
पकवान बनाकर, भांगड़ा भी पाइए।
फ़सलें पक गई हैं, सुनहरी बाली हैं,
कृषक प्रसन्न हैं, अन्न घर लाइए।
अंत में अध्यक्षा डॉ. अमर ठकराल देविका ने भविष्य में भी इसी तरह से आभासी कार्य शाला के आयोजन के लिए आश्वासन दिया।

