रिपोर्ट : बीके सिंह
लखीमपुर खीरी। सनातन धर्म में कोई भी पूजा पाठ विना कलश स्थापना किए नहीं होता है। कलश को संपूर्ण ब्रह्मांड का प्रतीक मानकर पूजा की जाती है।कलश में तेंइतीस कोटि देवताओं का निवास होता है।कलश का हमारी भारतीय संस्कृति में बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है।कलश हमारे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करता है।बड़ा सौभाग्य होता है जिन माताओं बहनों को अपने सिर पर कलश धारण करने का सौभाग्य प्राप्त होता है।सिर पर कलश धारण करने वाली माताओं बहनों का सुहाग अटल होता है।जिन पर ईश्वर की महान कृपा होती है उन्हें ही कलश शोभायात्रा में सिर पर कलश रखकर चलने का सौभाग्य मिलता है। उक्त विचार हैं श्री वेदमाता गायत्री प्रचार समिति के संस्थापक अध्यक्ष पं राजेश दीक्षित के जिन्होंने श्री वेदमाता गायत्री शक्तिपीठ शारदा नगर शारदा बैराज पर नवीन प्रयाग मेला नौ कुण्डीय गायत्री महायज्ञ के 49 वें वार्षिकोत्सव में कलश शोभायात्रा का पूजन कराते हुए कहे। विशाल कलश शोभायात्रा में सैकड़ों माताओं बहनों ने पीले वस्त्र धारण किया ऐसा लग रहा था जैसे मां शारदा नदी के पावन तट पर वासंती सरिता उमड़ पड़ी हो। कलश शोभायात्रा का संचालन पं उपेंद्र मिश्रा व सरोजनी मिश्रा ने किया।कलश शोभायात्रा शारदा नगर में बालाजी मंदिर में पूजा-अर्चना करने के बाद मां शारदा नदी में कलशों में पावन जल भरकर नौ कुण्डीय यज्ञशाला में आरती करने के साथ स्थापित किए गए एवं प्रसाद वितरण कर कलश शोभायात्रा का समापन किया गया।कलश शोभायात्रा में सैकड़ों माताओं बहनों एवं गायत्री परिवार परिजनों ने भाग लिया। कार्यक्रम अखिल विश्व गायत्री परिवार शांति कुंज हरिद्वार के तत्वावधान एवं परम पूज्य गुरुदेव पं श्री राम शर्मा आचार्य व परम वदनीया माता भगवती देवी शर्मा के सूक्ष्म संरक्षण में संपन्न हुआ।
