मुरली मनोहर पांडेय
साहित्य उपवन रचनाकार की काव्यगोष्ठी शर्मा न्यू आर्टस काॅलेज शक्तिनगर दिल्ली में आपसी प्रेम और सद्भावना की नज़ीर बन गई। उपवन की है कामना...बनी रहे सद्भावना - महफ़िल का उनवान निसंदेह सार्थक सिद्ध हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो० महासिंह पूनिया हिंदी विभागाध्यक्ष, इन्स्टीट्यूट ऑफ इन्टीग्रेटिड एण्ड ऑनर्स स्टडीज, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने की। मुख्य अतिथि मकबूल शायरा आ. कृष्णा दामिनी शर्मा रहीं। विशिष्ट अतिथि श्री देवीप्रसाद मिश्र राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, विश्व हिंदी परिषद, नयी दिल्ली एवं अंतर्राष्ट्रीय गीतकार शायर डाॅ० अशोक मधुप रहे। सारस्वत अतिथि की शोभा मशहूर शायद जनाब फरीद अहमद फरीद ने बढ़ाई। अंतरराष्ट्रीय कवि डाॅ० राकेश सक्सेना एवं डॉ० सुनीता सक्सेना ने महफ़िल को चार चांद लगाये। कार्यक्रम के सूत्रधार डॉ. रोहित रोज, डॉ.आर डी गौतम विनम्र एवं डॉ. सुधा बसोर सौम्या की आला दर्जे की व्यवस्था ने सबका मन मोह लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना से विधिवत हुआ। सरस्वती वंदना डॉ. सुधा बसोर सौम्या एवं संचालन डॉ.आर डी गौतम विनम्र ने बेहतरीन अंदाज में किया।
कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ. महासिंह पूनिया ने अपनी हिंदी के साथ सभ्यता संस्कृति को समृद्ध एवं पोषित करने का सन्देश दिया।
विशिष्ट अतिथि डॉ. देवीप्रसाद मिश्र ने सास बहू के सम्बंधों पर प्रेरक रचना पढ़ी। सुप्रसिद्ध शायर फरीद अहमद फरीद ने अपने चिरपरिचित अंदाज़ में श्राेताओं को मन्त्र मुग्ध कर दिया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डॉ. कृष्णा शर्मा दामिनी ने अपनी प्रस्तुति से श्राेताओं के अंतस को छूने वाली ग़ज़ल पढ़कर उन्हें तालियाँ बजाने पर मजबूर कर दिया। विशिष्ट अतिथि डॉ अशोक मधु ने श्रृंगार पर गीत सुनाकर सबका मन मोह लिया।
बकौल डॉ. आर डी गौतम विनम्र..
शातिरों का जमाना हुआ आज फ़िर।
कातिलों को बहाना मिला आज फ़िर।।
वो लगे थे जुटाने कज़ा शस्त्र ज़ब।
वक़्त का साथ हमको मिला आज फ़िर।।
अपनी प्रस्तुति का आरंभ डॉ रोहित रोज ने इन पंक्तियों से किया..
बड़ी तरकीब से साजिश रचाई जा रही समझो,
दिलों में आग नफरत की लगाई जा रही समझो।
सियासत के शिगूफों में मिलेगी 'रोज' चिंगारी,
इसी से फ़र्द इंसानी जलाई जा रही समझो।।
महफ़िल में चार चांद लगाने वाले रचनाकार रहे - मनीषा गुप्ता, डॉ. मदनलाल राज, डाॅ. नीलम बावरा मन, प्रभा दीपक शर्मा, गौतम प्रकाश, मुकेश निरुला, गोल्डी गीतकार गज़ब, शिवशंकर लोध राजपूत, सिम्पल भावना, कुलदीप कौर, अवधेश कनौजिया, रजनी बाला, विवेकानंद, दीपिका वल्दिया, इंदू मिश्रा किरण, पारुल राज, डाॅ. सरिता गर्ग सरि, अंजू अग्रवाल उत्साही, सरताज सबीना। कार्यक्रम की सबसे खास बात यह रही कि सबने मन से पढ़ा और मन सुना। कार्यक्रम में काव्य की लगभग सभी विधाओं एवं रसों की बारिश में मन का कोना कोना भीग गया। यह कार्यक्रम आपसी प्रेम और सद्भावना की एक नजीर बन गया। मंच के सभी अतिथियों को डाॅ० राकेश सक्सेना, डाॅ० सुनीता सक्सेना एवं रोहित रोज ने ट्राफी, शाल एवं मोतियों की माला से सम्मानित किया। सभी रचनाकारों को अंगवस्त्र एवं माला पहनाकर सुशोभित किया गया।
मंच की कार्यकारी अध्यक्षा संगीता मिश्रा ने फेसबुक पर कार्यक्रम का लाइव प्रसारण दूर दराज बैठे दर्शकों तक पहुंचाकर महनीय कार्य किया। चाय की चुस्की मिठास के साथ साथ शरीर को ऊष्मा प्रदान करती रही। साहित्य उपवन रचनाकार के संरक्षक डाॅ. राकेश सक्सेना एवं अध्यक्ष डॉ. रोहित रोज ने आमंत्रित अतिथियों एवं कवियों का आभार प्रकट किया। अंत में सभी स्वादिष्ट छोले भटूरे का आनंद लेकर मुस्कराते हुए विदा हुए।
